उत्तराखंडदेहरादून

उत्तराखंड के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी,आपदा प्रबंधन अलर्ट मोड़ पर

उत्तराखंड में मानसून अब और अधिक सक्रिय होने जा रहा है। मौसम विभाग ने 9 और 10 जुलाई को राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने भी आपदा प्रबंधन व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखते हुए सभी प्रमुख बांधों और बैराजों की रियल टाइम निगरानी के निर्देश दिए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते लोगों को सतर्क किया जा सके।

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार 8 से 11 जुलाई तक प्रदेश में तेज मानसूनी गतिविधियां बनी रहेंगी। 9 और 10 जुलाई को देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और चम्पावत में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। वहीं उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भी तेज बारिश, गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे जाने से बचने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने और अनावश्यक यात्रा से परहेज करने की अपील की है।
उधर संभावित भारी वर्षा को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। वही USDMA के उच्च अधिकारी विनोद कुमार सुमन ने बैठक में निर्देश दिए गए कि राज्य के सभी प्रमुख बांध और बैराज प्रतिदिन सुबह 8 बजे और शाम 8 बजे अपने जलाशयों का जलस्तर, इनफ्लो, आउटफ्लो और डिस्चार्ज की अद्यतन रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) को भेजेंगे।
साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया है कि यदि किसी बांध या बैराज से पानी छोड़ा जाना हो तो उसकी पूर्व सूचना राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और संबंधित जिला प्रशासन को दी जाएगी। सूचना में यह भी बताया जाएगा कि छोड़ा गया पानी कितने समय में किन क्षेत्रों तक पहुंचेगा, डाउनस्ट्रीम इलाकों में नदी का जलस्तर कितना बढ़ सकता है और उसका संभावित प्रभाव क्या होगा। इसके आधार पर संवेदनशील क्षेत्रों में समय रहते अलर्ट जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और आवश्यक एहतियाती कदम उठाने में मदद मिलेगी।
बैठक में नदी जलस्तर सेंसर, डिस्चार्ज मॉनिटरिंग सिस्टम, ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और अर्ली वार्निंग सिस्टम को और मजबूत बनाने के निर्देश भी दिए गए, ताकि मानसून के दौरान किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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